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Super Exam General Studies Dance and Music / नृत्य और संगीत Question Bank लोकसंगीत, चित्रपट संगीत एवं भजन गीत (संगीत कला भाग 3)

  • question_answer
    निम्न में से कौन सा/कौन से लोकसंगीत राजस्थान से सम्बंधित है?.
    1. मांड
    2. धुडला
    3. भात व माहेरा
    4. बना- बनी

    A) 1 और 4                   

    B) 2, 3 और 4

    C) 1 और 3                   

    D) 1, 2, 3 और 4

    Correct Answer: D

    Solution :

    उत्तर - 1, 2, 3 और 4
    व्याख्या - उपरोक्त सभी लोकगीत राजस्थान से सम्बंधित है। जिनके विषय मे संक्षिप्त जानकारी निम्नानुसार है
    मांड - यह सबसे लोकप्रिय राजस्थानी लोक संगीत है जो शाही दरबारों में विकसित हुआ था और स्थानीय संगीतकार इसे बजाते हैं। संगीतकारों द्वारा पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं और लोक गायक तेजाजी, गोगाजी और रामदेवजी जैसे राजपूत शासकों की महिमा और प्रशंसा गाते हैं। सबसे प्रसिद्ध राजस्थानी मांड गायकों में से एक बीकानेर घर के अल्लाह जिलई बाई है।
    बना-बनी - राजस्थानी संस्कृति के अनुसार जिस युवक व युवती की शादी होने वाली होती है, उस युवक को बना तथा युवती को बनी कहा जाता है। विवाह के अवसर बना-बनी बनकर जो गीत गाये जाते है, वे ‘बना-बनी’ कहलाते है।
    भात व माहेरा - भात भरना राजस्थान की एक महत्वपूर्ण प्रथा है। इसे ‘माहेरा या मायरा’ भी कहते हैं। जिस स्त्री के घर पुत्र या पुत्री का विवाह पड़ता है वह घर की अन्य स्त्रियों के साथ परात में गेहूं और गुड़ लेकर पीहरवालों को निमंत्रण देने जाती है। इसको ‘भात’ कहते हैं। मेवाड़ में इसे बत्तीसी कहते हैं। मूल रूप में भात भाई को दिया जाता है। भाई के अभाव में पीहर के अन्य लोग ‘माहेरा’ स्वीकार कर वस्त्र तथा धन सहायता के रूप में देते हैं। इस अवसर पर भात गीत की तरह अनेक गीत गाए जाते हैं।
    पनिहारी- इस लोक संगीत को महिलाओं द्वारा गाया जाता है और इनमें से अधिकांश गीतों की थीम पानी की कमी और गांव के पास की महिलाओं के लोकसंगीत, चित्र उनके दैनिक काम पर आधारित है। इनमें से कुछ पनिहारी लोक गीत प्रेमियों के साथ संयोग से हुए हैं और कुछ सास और बहू के संबंधों पर आधारित हैं। यह पनघट से जुड़े लोक गीतों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है। पणिहारी गीत में राजस्थानी स्त्री का पतिव्रता धर्म पर अटल रहना बताया गया है। इसमें पतिव्रत धर्म पर अटल पणिहारिन व पथिक के संवाद को गीत रूप में गाया जाता है। जैसे - कुण रे खुदाया कुआं, बावड़ी ए पणिहारी जी रे लो।


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